गरीब और ईमानदार किसान की कहानी best honesty farmer story in hindi for kids

⛏️ दोस्तों आज मै आपके लिए एक शानदार कहानी लाया हूँ इसे आप अपने बच्चों को जरूर सुनाए इस कहानी में सिखने को काफ़ी कुछ है

ईमानदार लकड़हारे किसान की कहानी

एक वक्त की बात है छोटे से गाँव का रहने वाला राजू नाम का किसान अपने घर से बहुत दूर लकड़िया काटने जा रहा था उसने सोचा वो जंगल से लकड़िया काटकर बाज़ार में बेचकर अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में भर्ती कर सकता है

राजू जंगल के सबसे पुराने पेड़ के पास पहुंचा और पेड़ से कहा
ईमानदार किसान की कहानी

राजू : मुझे माफ़ करना पेड़. मै अपने फायदे के लिए तुम्हारी कुछ डाली काटने वाला हूँ लेकिन मेरी भी कुछ मजबूरिया है मुझे अपने बच्चों को अच्छे स्कूल मे भर्ती करना है उम्मीद करता हूँ की तुम मेरी मजबूरिया समझ सकते हो.

पेड़ : कोई बात नहीं दोस्त तुम मेरी डालिया काट सकते है और उसे बेचकर अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा देना
जैसे ही राजू अपनी कुल्हाड़ी से पेड़ की डाली काटने की कोशिश करता है तभी उसकी कुल्हाड़ी हाथ से निकल कर पेड़ के पास मौजूद नदी मे गिर जाती है ये देखकर राजू काफ़ी परेशान और उदास हो जाता है और नदी के किराने बैठकर रोने लगता है तभी

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नदी से एक तेज़ रौशनी आती है ये रोशनी इतनी तेज़ होती है की राजू की आँखे बंद हो जाती है और राजू दर जाता है . राजू ने अपनी आँखे खोली तो राजू के सामने एक सुन्दर सी परी नदी से बाहर आ रही होती है. राजू उसे देखता ही रहा. उस परी के हाथो मे एक चांदी की कुल्हाड़ी थी और दूसरे हाथ मे सोने की कुल्हाड़ी

परी: राजू क्या ये तुम्हारी ही कुल्हाड़ी है जो नदी मे गलती से गिर गई थी

राजू : नहीं नहीं! मेरी कुल्हाड़ी ये नहीं है मेरी कुल्हाड़ी तो लोहे की थी और थोड़ी पुरानी दिखती थी

परी वापस नदी के अंदर चली गई और राजू देखता रहा राजू को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की ये उसके साथ क्या हो रहा है.
परी फिर से नदी से बाहर आती है और इस बार परी के हाथो मे राजू की लोहे की कुल्हाड़ी होती है 

परी : राजू क्या यही तुम्हारी कुल्हाड़ी है जो नदी मे गलती से गिर गई थी

राजू : जी हा! यही मेरी कुल्हाड़ी है तभी परी बोली

परी : राजू मै तुमसे बहुत खुश हुई तुमने मुझसे सच बोला और सोने की कुल्हाड़ी को अपनी कुल्हाड़ी नहीं बताया इसलिए मै तुम्हे ये सोने की कुल्हाड़ी उपहार मे देती हूँ

राजू: आपका धन्यवाद मै इससे अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा दे पाउँगा धन्यवाद!

फिर परी वापस नदी मे समा जाती है और ये सब उसके ही गाँव का एक अजय नाम का लालची किसान देख लेता है

अजय बहुत लालची होता है इसीलिए अगले दिन अजय भी उसी पेड़ को काटने जाता है और अपनी कुल्हाड़ी जानबुच कर नदी मे गिरा देता है और परी के आने का इंतज़ार करता है

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काफ़ी देर के बाद नदी से बहुत तेज़ रौशनी निकलने लगती और अजय की आँखे बंद हो जाती है आँखे खोलने पर उसे नदी वाली परी दिखाई देने लगती है परी के हाथ मे दो कुल्हाड़िया थी एक सोने की कुल्हाड़ी और दूसरी चांदी की कुल्हाड़ी फिर परी ने अजय से पूछा 

परी : अजय क्या ये तुम्हारी ही कुल्हाड़ी है जो गलती से इसलिए नदी मे गिर गई थी

अजय ने कहा: जी हा! ये सोने की कुल्हाड़ी मेरी ही है जो मुझसे गलती से इस नदी मे गिर गई है लाओ मुझे वापस दे दो

परी ने गुस्से मे कहा : नहीं! तुमने मुझसे झूठ बोला इनमे से कोई भी कुल्हाड़ी तुम्हारी नहीं है यहां से वापस चले जाओ

फिर परी नदी के अंदर वापस चली जाती है और अजय की लोहे वाली कुल्हाड़ी भी उसे वापस नहीं मिलती 

जबकि राजू ने उस सोने की कुल्हाड़ी को बेचकर अपने बच्चों को स्कूल मे भी भर्ती कर दिया और अपने लिए एक बड़ा सा घर भी ख़रीदा और अब राजू और उसका परिवार हसीं ख़ुशी से रहता है

इसलिए बच्चों याद रहे कुछ भी हो हमें हमेशा सच बोलना चाहिए क्योंकि सच बोलने का फल भी मीठा होता है 

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