शेर की कहानिया बच्चों के लिए

एक समय की बात है जंगल का राजा शेर काफ़ी थका हुआ था और अपने लिए कुछ खाना भी ढूंढ रहा था उसे उतर कुछ मिल नहीं रहा था तब उसने सोचा क्यों ना दूसरे वाले जंगल मे जाकर खाना ढूंढा जाए वहा कुछ मज़ेदार खाने को मिल सकता है ये सोचकर वो दूसरे जंगल की और निकल पड़ा रास्ते है उसे थोड़ी थकान हो गई तो वो एक बड़े से पेड़ के निचे जाकर लेट गया और सोने लगा कुछ देर बाद उसे कोई हलचल महसूस होती है और वो थोड़ा आगे बढ़कर देखने की कोशिश करता है तब उसे वहा एक सुंदर सा हिरन नज़र आता है वो धीरे धीरे उस हिरन के पास जाता है हिरन को कुछ पता नहीं चल पता और शेर उसपर छलांग लगा कर उसे पदक लेता है और कहता है

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शेर की कहानिया


शेर : वा आज तो खाना खाने मे मज़ा ही आ जायगा आज मे तुझें खाने मे खाऊंगा तेरी कोई आख़री इच्छा हो तो बता दे मै शायद पूरी कर दू

हिरन : जंगल के राजा आप तो बहुत ताकतवर है और बुद्धिमान भी है आपको तो बड़े बड़े जानवर को पढ़कर खाना चाहिए मै तो कितना छोटा सा जानवर हूँ अगर आप मुझे खा लोगे तो जंगल के बाकि जानवर कहेँगे की वो तो जंगल का राजा है फिर भी कमज़ोर जानवरो को खाता है फिर किस बात का राजा हुआ

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ये सुनकर शेर हैरान हो गया और उसे लगा की ये हिरन तो बिलकुल सही बोल रहा है अगर मैंने इसे खाया तो मै किस बात का जंगल का राजा हुआ ये सुनकर शेर उसे छोड़कर आगे बढ़ने लगा बहुत देर के बाद उसे कोई और जानवर नज़र नहीं आया तो वो फिर से किसी पेड़ के निचे लेट गया उसे तभी किसी खरगोश के दौड़ने की आवाज़ सुनाई थी और वो उस आवाज़ के पीछे पीछे चला गया उसने देगा की एक बहुत सुंदर खरगोश सामने खड़ा है वो उसके पीछे पीछे धीरे धीरे जाने लगा और उस खरगोश को पढ़कलिए और उससे पूछा

शेर : बोल तेरी आख़री इच्छा क्या है शायद मै पूरी कर दू

खरगोश : शेर भैया तुम जंगल के राजा हो फिर भी मेरे जैसे छोटे से जानवर को खाओगे जाओ किसी बड़े जानवर को पकड़ो फिर सबकओ पता चलेगा की तुम इसलिए जंगल के राजा कहलाने के हकदार हो

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ये सुनकर राजा आगे बढ़ने लगता है और उसेकोई भी जानवर नहीं मिलता और वो पुरे जंगल मै इधर उधर भटकता रहता है 

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