चालाक लोमड़ी और मासूम बकरी की कहानी

नमस्कार दोस्तों आज मै आपके लिए लाया हूँ चालाक लोमड़ी की कहानी उम्मीद है आपको ये कहानी अच्छी लगेगी तो बिना किसी देरी के शुरू करते है और अगर आपको हमारी कहानियाँ और शायरी अच्छी लगती है तो इसे अपने दोस्तों को भी शेयर कियजिये

लोमड़ी और बकरी की कहानी:

एक बार की बात है एक भूखी लोमड़ी अपने लिए कुछ अच्छा सा खाना ढूंढने के लिए जंगल के अंदर घंटो से घूम रही थी शाम होने को आई थी लेकिन उस लोमड़ी को अभी तक खाने को कुछ भी नहीं मिला उस लगा की उसे जंगल से निचे जाना चाहिए
लोमड़ी और बकरी की कहानी
ये सोचकर वो जंगल से निचे उतरने लगी रास्ते चलते चलते उसका पैर फिसल गया और वो लोमड़ी एक बड़े से गढ़े मे जा गिरी और चिल्लाती रही " बचाओ बचाओ " लेकिन रात काफ़ी हो गई थी और उसे बचाने के लिए कोई उसके आस पास भी नहीं था रात भर लोमड़ी उसी गढ़े मे गिरी रही और धीरे धीरे सुबहे हो गई तभी लोमड़ी को आवाज़ आई

उसको लगा कोई उसके आस पास है ये सुनकर लोमड़ी चिल्लाई " बचाओ बचाओ " और ये सुनकर एक बकरी उस गढ़े के ऊपर आकर खड़ी हो गई

बकरी बोली : अरे ओ लोमड़ी तुम इस गढ़े मे क्या कर रही हो कही तुम इसमें गिर तो नहीं गई


लोमड़ी को लगा अगर वो इसे बता देगी की वो इसलिए गढ़े मे गिर गई है तो वो बकरी यहां से चली जायगी और मे हमेशा के लिए इसी गढ़े मे रह जाउंगी

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तभी लोमड़ी बोली : अरे नहीं नहीं! मैंने सुना था की इसलिए जंगल मे भूकंप आने वाला है इसीलिए मे इसलिए गढ़े मे आ कर छुप गई हूँ. देख क्या रही हो तुम भी जल्दी आओ और मेरे साथ छुप जाओ

ये सुनकर बकरी भी उस गढ़े मे कूद गई और लोमड़ी के पास चली गई और लोमड़ी उस बकरी के ऊपर चढ़कर गढ़े से बाहर निकल गई और बकरी अंदर ही रह गई 

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